Archive for the ‘समझी-सोची’ Category

आज सुबह सुबह बहुत अच्छी खबर आयी है कि शिबू सोरेन को दिल्ली हाईकोर्ट ने बरी करार दे दिया। जिन सबूतों के आधार पर शिबू सोरेन को निचली अदालत ने सजा सुनाई थी उन्हें हाईकोर्ट के न्यायमूर्तियों ने नाकाफी माना है और सीबीआई को लताड़ लगाई है। सभी नेता, एमपी, एमेले बहुत भले लोग होते […]


एक देश में एक नौकरशाह अपना आसाम का झूठा पता (द्वारा श्रीमती हितेश्वर सैकिया) देकर राज्यसभा का सीट हथिया सकता है. कोई नहीं पूछता कि उनका श्रीमती हितेश्वर सैकिया के घर में किस हैसियत से रहना था। एक देश में एक नामी वकील केवल राज्यसभा की कुर्सी के लिये पटना का झूठा पता लिखाता है. […]


कल “शहीद भगत सिंह और साथियों के दस्तावेज” में तब के कम्युनिस्ट आंदोलन पर भगतसिंह के विचार को पढ़ते समय मुझे बाबा नागार्जुन की एक कविता ध्यान आयी और वो कविता मैंने अपने चिठ्ठे पर प्रस्तुत कर डाली। इस कविता पर एक प्रतिक्रिया आयी कि “बाबा की यह कविता नासमझों के लिये नहीं हैं”। अधिकतर […]


हम पिछला पूरा सप्ताह गुजरात में थे ये एक सप्ताह का गुजरात प्रवास हमारी यादों में रच बस गया है। अहमदाबाद में हम एक तिपहिये में जा रहे थे। रास्ते में हमने टैक्सीवाले से गुजरात के दंगो के वारे में पूछा। टैक्सी चालक हाशिमभाई ने समझा कि हम अखबारवाले हैं और हमें टैक्सी से उतार […]


शहीद भगत सिंह के 1928 में लिखे लेख का एक हिस्सा पढि़ये. “साम्प्रदायिक दंगों को भड़काने में विशेष हिस्सा लेते रहे हैं वे अखबार वाले हैं। पत्रकारिता का व्यवसाय जो किसी समय ऊंचा समझा जाता था आज बहुत गन्दा हो गया है ये लोग एक दूसरे के विरुद्द बड़े मोटे मोटे शीर्षक देकर परस्पर सिर […]