Archive for the ‘बाबा नागार्जुन’ Category

(हरिजन गाथा का पहले का भाग यहां बांचा गया था, शेष भाग बांचा जा रहा है) “सुनते हो”, बोला खदेरन “बुद्धू भाई, देर नहीं करनी है इसमें चलो, रख बच्चे को रख आवें बतला गये हैं गुरु महाराज बचे को मां सहित हटा देना है कहीं फौरन बुद्धू भाई बुद्धू ने माथा हिलाया खदेरन की […]


(हरिजन गाथा बाबा की दिल को छू जाने वाली कृति है़। ये है तो तीन भागों में पर आपकी सुविधा के लिये इसे दो हिस्सों में प्रस्तुत किया जा रहा है।) एसा तो कभी नहीं हुआ था महसूस करने लगीं वे एक अनौखी बैचेनी एक अपूर्व आकुलता उनकी गभकुक्षियों के अंदर बार बार उठने लगीं […]


(बाबा नागार्जुन से पहली बार मेरा साबका दिल्ली में कमानी आडिटोरियम के बाहर हुआ था। वे जमीन पर बैठे थे और मैंने उन्हें पहचान लिया था। उनके चरण स्पर्श करके बस कुछ बात होने वाली ही थीं कि नेशनल स्कूल आफ ड्रामा के कुछ स्टूडेन्ट आ गये थे और बाबा को ले गये थे। बाबा […]