Archive for the ‘बात-बेबात की’ Category

लो समझ लो बात

01सितम्बर15

आज सुबह 8.30 को इस ब्लोग की एक पोस्ट में शब्द का 31 agst, 2007 shukrawaar उपयोग किया गया. और गूगल सर्च में यह केवल पांच घंटे बाद 1.30 पर शामिल हो गया है। नीचे फोटो देखिये ये पोस्ट उस एग्रीगेटर में नहीं दिखी जिसके गुड़गान बखाने जा रहे थे। कल ये शब्द बारमेड पोलीस […]


Oh Narad Naaaaraad

01सितम्बर15

अगर अलाने फलाने एग्रीगेटर से ही गूगल बाबा दिन में दो बार आपके ब्लाग पर घूम जाते है तो इस पोस्ट को गूगल में सर्च कीजिये “31 agst, 2007 shukrawaar” ये गूगल में कैसे उपस्थित है जबकि ये किसी अलाने फलाने एग्रीगेटर में नहीं है, ये तो सिर्फ नारद में ही है.


हमने आईसीआईसीआई बैंक से एक लोन क्या ले लिया रोजाना की चख चख मोल ले ली। आये दिन टेलीमार्केटियरों के फोन। इनसे निपटने को समीर भाई का बताया कविता सुना डालने का आईडिया भी काम नहीं आया। अब इनसे निजात मिलने वाली है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्रधिकरण ने काल नहीं करें रजिस्ट्री बन दी है। […]


कल “शहीद भगत सिंह और साथियों के दस्तावेज” में तब के कम्युनिस्ट आंदोलन पर भगतसिंह के विचार को पढ़ते समय मुझे बाबा नागार्जुन की एक कविता ध्यान आयी और वो कविता मैंने अपने चिठ्ठे पर प्रस्तुत कर डाली। इस कविता पर एक प्रतिक्रिया आयी कि “बाबा की यह कविता नासमझों के लिये नहीं हैं”। अधिकतर […]


आशा भौंसले एक संवेदनशील कलाकार हैं । एक समारोह में जब हिमेश रेशमिया ने कहा कि राहुल देव बर्मन भी तो नाक से गाते थे तो आशा ने जबाब में कहा कि “चांटा मार दूंगी”। स्टार एन्ड स्टायल की कानन दिवेचा ने कहा था शर्मिला टैगोर भद्दी लगती थी. सैफ अली खान ने उसकी गर्दन […]