कितने सारे पासवर्ड याद रखें?

18सितम्बर15

नेट जाल अब जंजाल बनता जा रहा है. हर वेबसाईट चाहती है कि हम उसे अपनी ई-मेल पता थमा दें. ई-मेल की सेवा देने वाली वेबसाइट पर हम लागिन कर सेवा प्रयोग करें तो ठीक था पर अब हर एक एरा गैरा नत्थू खैरा चाहता है कि हम उस पर लागिन करके ही उसकी सेवा का लाभ उठाये तो ये कहां तक सही है?

टैक्नोराती, डिग वगैरह की बात छोड़िये अब तो न्यूज पोर्टल तक चाहती है कि उसे अपनी ई-मेल पता जरूर जरूर थमायें और फिर बाद में आनेवाली अनचाही ई-मेल की बाढ़ झेलने के लिये तैयार रहें.

इन लागिन के झमेले से मुक्ति का कोई न कोई रास्ता तो निकालना ही होगा.

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