वाह जी वाह.. इंदौर से पहली महिला ब्लॉगर बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है. संस्कारधानी नगरी से दीक्षित होने का स्पष्ट प्रभाव आपके ब्लॉग पर परिलक्षित हो रहा है. मेरी शुभकामनाएं.
संस्कारधानी होने का गौरव मात्र हमारे शहर जबलपुर को प्राप्त है. इंदौर नजदीक है, यह भी गौरव का विषय है.
स्वागत है, वैसे तो हर वक्त हमारे शहर का होने का या कहलाने का. हम तो खुद ही इंदौर के आभारी हैं. वहीं से हमने अपना सी ए फाईनल पास किया और लखनऊ हमारी ननिहाल.
वाह समीर भाइ हम अगर इंदौर या जबलपुर से नही है तो हम संसकार वाली जगह से नही है और लखनऊ की तो रीत है पहले आप फ़िर आपके साथ वाले बाद मे हम और आप कुछ और कह रहे है
शिल्पा जी बहुत बहुत स्वागत आपका ब्लोगर्स पार्क मे
शिलपा जी बाबा की एक कविता जो इगलैंड की महारानी के भारत मे पधारने पर स्वागत के विरोध मे थी “हाथी घोडा पालकी जै कन्हैया लाल की”
आओ महारानी आओ,हम उठाये पालकी”
ढ्ढ दे तो मै आपका बहुत आभारी हूगा
वाह जी वाह.. इंदौर से पहली महिला ब्लॉगर बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है. संस्कारधानी नगरी से दीक्षित होने का स्पष्ट प्रभाव आपके ब्लॉग पर परिलक्षित हो रहा है. मेरी शुभकामनाएं.
नीरज भाई
संस्कारधानी होने का गौरव मात्र हमारे शहर जबलपुर को प्राप्त है. इंदौर नजदीक है, यह भी गौरव का विषय है.
स्वागत है, वैसे तो हर वक्त हमारे शहर का होने का या कहलाने का. हम तो खुद ही इंदौर के आभारी हैं. वहीं से हमने अपना सी ए फाईनल पास किया और लखनऊ हमारी ननिहाल.
ब्लॉग जगत में स्वागत है आपका.
चिट्ठासंसार में आपका स्वागत है.
सुस्वागतम।
वाह समीर भाइ हम अगर इंदौर या जबलपुर से नही है तो हम संसकार वाली जगह से नही है और लखनऊ की तो रीत है पहले आप फ़िर आपके साथ वाले बाद मे हम और आप कुछ और कह रहे है
शिल्पा जी बहुत बहुत स्वागत आपका ब्लोगर्स पार्क मे
शिलपा जी बाबा की एक कविता जो इगलैंड की महारानी के भारत मे पधारने पर स्वागत के विरोध मे थी “हाथी घोडा पालकी जै कन्हैया लाल की”
आओ महारानी आओ,हम उठाये पालकी”
ढ्ढ दे तो मै आपका बहुत आभारी हूगा