जी समीर जी, ये बस एक संदेशा पहुंचाने की कोशिश ही तो है।
जी अभय जी, ये फोटो मेरी नहीं, पब्लिक डोमेन फोटो हैं, कोई भी कहीं भी इनका उपयोग कर सकता है।
एकदम भारतीय परिवेश में इस तरह की लगभग 2000 फोटो हैं और एक सीडी पर उपलब्ध हैं
बेहतरीन. लेकिन एक चीज मुझे आज तक नहीं मिली… जब मैं छोटा था तो मेरी दादी मुझे पनपथी रोटी व कनेमन(मसाले वाला नमक) देती थी. वह हाथ को गीले करके बनाई जाने वाली पनपथी रोटी इन चित्रों को देख कर याद आ गई.
कल्पना करी अलग अलग पोस्ट की…मन से एकदम आभार निकला कि आपने पाँच बार में पोस्ट नहीं की. काश, सब यह बात समझ पाते.
बढ़िया तस्वीरें.. कभी अपने ब्लॉग पर इस्तेमाल कर सकने की इजाज़त है?
जी समीर जी, ये बस एक संदेशा पहुंचाने की कोशिश ही तो है।
जी अभय जी, ये फोटो मेरी नहीं, पब्लिक डोमेन फोटो हैं, कोई भी कहीं भी इनका उपयोग कर सकता है।
एकदम भारतीय परिवेश में इस तरह की लगभग 2000 फोटो हैं और एक सीडी पर उपलब्ध हैं
समीरलालजी की टिप्पणी भी कम मजेदार नहीं.
बेहतरीन. लेकिन एक चीज मुझे आज तक नहीं मिली… जब मैं छोटा था तो मेरी दादी मुझे पनपथी रोटी व कनेमन(मसाले वाला नमक) देती थी. वह हाथ को गीले करके बनाई जाने वाली पनपथी रोटी इन चित्रों को देख कर याद आ गई.
माफी चाहूंगा. जब आपकी पिछली पोस्ट यहां भी खाना ही बन रहा है पर गया तो काफी कुछ बचपन की उस रोटी के निकट खुद को पाया.
ठीक है जी कर ली कल्पना, आपको 5 बार आभार।
ye bharat ki sanskarti ka ek jharokha hain.