आज सुबह सुबह बहुत अच्छी खबर आयी है कि शिबू सोरेन को दिल्ली हाईकोर्ट ने बरी करार दे दिया। जिन सबूतों के आधार पर शिबू सोरेन को निचली अदालत ने सजा सुनाई थी उन्हें हाईकोर्ट के न्यायमूर्तियों ने नाकाफी माना है और सीबीआई को लताड़ लगाई है।

सभी नेता, एमपी, एमेले बहुत भले लोग होते हैं। यदि बुरे होते तो जनता उन्हें चुनकर क्यों भेजती? हमारे कुंडावाले राजा भैया भी बहुत ही सज्जन व्यक्ति हैं। इनके साथ के सभी लोग भी बहुत ही सज्जन पुरुष हैं। इन्हें मायावती ने पहले भी रंजिशवश फंसाया था और अब भी फंसा रही है। बेचारे डीपी यादव के बारे में पता कीजिये, लाखों लोग कसम खाकर कहेंगे कि बहुत ही सत्पुरुष हैं।
यदि ये नेता लोग बेईमान होते तो क्या आजादी के सठियाने तक एक भी नेता को सजा नहीं होती? लोग तो इन भले लोगों के खिलाफ अंट शंट ही बकते रहते हैं।
आप कितना भी सबूत जुटा लें जिन सबूतों के आधार पर एक आम आदमी जिन्दगी भर के लिये नप जाय उतने तो नेताओं को एक महीने के लिये भी अन्दर नहीं कर पाते।
जब हमारे नेता, एमपी, एमेले भले हैं ही तो इनके खिलाफ कोई केस भी क्यों दायर किया जाय? एक कानून बना देना चहिये कि जितने भी एमपी, एमेले हैं और इनके जितने भी इर्द गिर्द के चंगू मंगू हैं, इनको कानूनन सद्पुरुष मान लिया जाय और इनके खिलाफ आजीवन कोई भी कैसा भी मामला नहीं चलाया जाय।
आखिर भईया पईसा तो हम आनेस्ट टैक्सपेयर का ही लगता ना?
Filed under: समझी-सोची | 1 Comment
सजा के लिए गरीब और आम आदमी जो है।