शहीद भगत सिंह और अखबार वाले
25May07
शहीद भगत सिंह के 1928 में लिखे लेख का एक हिस्सा पढि़ये.
“साम्प्रदायिक दंगों को भड़काने में विशेष हिस्सा लेते रहे हैं वे अखबार वाले हैं।
पत्रकारिता का व्यवसाय जो किसी समय ऊंचा समझा जाता था आज बहुत गन्दा हो गया है ये लोग एक दूसरे के विरुद्द बड़े मोटे मोटे शीर्षक देकर परस्पर सिर फुटौव्वल कराते हैं। एक-दो जगह ही नहीं कितनी ही जगहों पर इसलिये दंगे हुये हैं कि स्थानीय अखबारों ने बड़े उत्तेजनापूर्ण लेख लिखे हैं।”
“भगतसिंह और उनके साथियों के दस्तावेज - पेज 218 प्रकाशन राजकमल प्रकाशन”
क्या आपको एसा नहीं लगता कि आज के अखबार वालों के बारे में लिखा जा रहा है?
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हा हा, मतलब यह कि बीमारी नई नहीं बल्कि पुरानी ही है
bilkul prasangik lagataa hai…
भगत सिंह जी के विचार हम तक पहुँचाने हेतु धन्यवाद। आपके लेख का लिंक यहाँ, इस कड़ी पर भी प्रेशित कर दिया है।