यहां इन्दौर में पिछले एक माह में तीन बार यह शहर दंगे की आग में जलने की कोशिश कर रहा है। इस झगडे की वजह क्या थी? एक रंगरेज की दूकान पर किसी लडकी ने एक पता पूछने की कोशिश की और वहां पर कुछ मनचलों ने उस लडकी पर कुछ कमेंट कर दिये। चंद मिनटों मे कुछ लोग इधर से बोले और कुछ उधर से। दोनों पक्ष आमने सामने हो गये और शुरू हो गया दंगा।

उदापुर, मुकेरीपुर, इतवारिया बाजार, बंबई बाज़ार, लोहारपट्टी, कैलाशमार्ग, जिंसी सभी साम्प्रदायिकता से झुलस रहे हैं। शान्तिकमेटियां और आग में घी डाल रही हैं ।

इस दंगे के पीछे किसी विदेशी ताकत का हाथ तो नहीं है? क्या मध्यप्रदेश को गुजरात बनाने की तैयारी तो नहीं है?



14 Responses to “क्या इन्दौर को गुजरात बनाने की तैयारी है ?”  

  1. शिल्पाजी,
    शान्ति-समितियाँ अगर सरकारी पहल पर गठित होती है तब ही यह संभावना होती है कि वे ‘आग में घी’ का काम करें । अ-सरकारी(लोगों की पहल पर बनीं) शांति समितियाँ असरकारी होती हैं ।
    आशा है आपके शान्तिप्रिय शहर में दंगा-शमन और सौहार्द-बहाली शीघ्र हो जाएगी।
    अफ़लातून

  2. चिठ्ठे पर पधारने के लिए शुक्रिया शिल्पा जी।
    इन्दौर को गुजरात बनाने की तैयारी हो ना हो लेकिन इस बात में दो मत नही हो सकता कि आज हमारी नई पीढ़ी ज्यादा ही असहिष्णु और छोटी से छोटी बात को अपने तथाकथित “ईगो” पर लेने वाली बनती जा रही है।
    इन्दौर एक प्यारा शहर है, यहां भी यह सब मुर्खता देख कर दुख ही हुआ, आशा है जल्द ही इन्दौर अपनी पुरानी लय पर आ जाएगा।
    शुभकामनाएं

  3. स्वागत है आपका हिन्दी चिट्ठाजगत में. आशा है आपने अपने आगमन की सूचना नारद http://narad.akshargram.com/ को दे दी होगी. इंदौर से तो यूँ भी मेरा बड़ा करीबी रिश्ता रहा है, वहाँ से आती इस तरह की खबरें दिल को दुखी करती हैं. आशा है, लोग बाग इन सियासी चालों को समझेंगे और हर तरह पुनः शांति बहाल होगी. एक बार पुनः आपका स्वागत और निरंतर लिखने के लिये शुभकामनायें.

    आपके चिट्ठे पर टिप्पणी करने के लिये वर्ड प्रेस में लॉग ऑन करना पड़ रहा है जो कि अनेकों चिट्ठाकारों के लिये संभव नहीं होगा, जो ब्लाग स्पाट पर लिखते हैं. इसके लिये कुछ करें. :)

    समीर लाल (उड़न तश्तरी)
    http://udantashtari.blogspot.com/

  4. हिन्दी चिट्ठा जगत मे आपका हार्दिक स्वागत है। बेहतर होगा कि आप अपना चिट्ठा नारद पर पंजीकृत कराएं।

  5. आपका स्वागत है।

  6. समीर लाल (उड़न तश्तरी) जी, आपने नारदजी से मेरा परिचय तो करा दिया पर इसे नारदजी से जुडवाने का तरीका तो नहीं बताया. जितु९९६८ ने नारद पर पंजीकृत का लिंक दिया. अब मेंने अपना चिट्ठा नारद पर पंजीकृत करा लिया है.

  7. हार्दिक स्वागत है शिल्पा चिट्ठाजगत में आपका। आज चिट्ठाचर्चा पर आपकी टिप्पणी देखकर यहाँ आया।

    परिचर्चा में भी अविलंब आ जाइए।

  8. शिल्पा जी चिट्ठा जगत में आपका बहुत-2 स्वागत है ।
    रही बात विदेशी ताकतों की , तो हम हिन्दुस्तानियों को क्या कम आँकती हैं आप, हम दंगें करवाने और करने में पूर्णतया सक्षम हैं :)

  9. हिंदी में लिखना शुरू करने के लिये बहुत-बहुत बधाई!

    हिन्दी चिट्ठाजगत मैं आपका हार्दिक स्वागत है।

    - गिरिराज जोशी “कविराज”
    http://www.girionline.com/blog

  10. शिल्पाजी, नए चिट्ठे के लिए बधाई. आशा है आप नियमीत लिखती रहेंगी.
    कृपया टिप्पणी के लिए लोगिन होने वाला विकल्प हटा लें, ताकि हम सब आपको अपनी बात पहूँचा सकें.

    इन्दौर में जल्दी से जल्दी शांति स्थापित हो, ऐसी कामना करता हूँ.

    आप घबराएं नहीं मध्यप्रदेश गुजरात नहीं बन सकता, दिल्ली या भागलपुर बने तो कह नहीं सकता.

  11. आपका शहर अशांत हुआ, जानकर दुःख हुआ.

    लम्बा इतिहास है…

    दिल्ली
    भागलपुर
    हुबली
    आज़मगढ
    भागलपुर
    मालेगाँव
    मुम्बई
    हैदराबाद
    कलकत्ता
    अलीगढ
    सिल्चर
    कोईम्बटुर
    वाइजेग

    जी, गुजरात भी… :)

    फिर भी नहीं सुधरते लोग…

  12. मध्य प्रदेश गुजरात बने थोडा मुश्किल है, पर मुझे खुशी होगी अगर बना तो.

  13. हिंदी में लिखना शुरू करने के लिये बहुत-बहुत बधाई शिल्पाजी, आशा है आपने नारद जी को सुचीत कर दिया होगा.

    आगे लिखते रहें…

    ————————————————————————-

    “क्या मध्यप्रदेश को गुजरात बनाने की तैयारी तो नहीं है?”

    - आपके इन शब्दों पर तथा जिस सन्दर्भ में लिखे गए हैं, मैं अपनी कडी आपत्ति दर्ज करा रहा हुँ।

    वैसे इन्दौर(मध्यप्रदेश) गुजरात(खुशहाली, आर्थिक विकास, शानदार बुनियादी सुविधाएँ, सम्पन्नता) बन जाए, तो मुझे अत्यन्त हर्ष होगा।

  14. आपका चिट्ठा नारद पर नहीं था, इसलिए पहले नहीं देख सका। आपके द्वारा किसी अन्य चिट्ठे पर की गई टिप्पणी से यहाँ तक आया हूँ। सबसे पहले आपका स्वागत चिट्ठा जगत में।
    आप कितने समय से इन्दौर में हैं पता नहीं। मैं शुद्ध इन्दौरी हूँ और कुछ समय गुजरात में भी रहा हूँ। यदि मध्यप्रदेश, गुजरात बनने जा रहा है तो अच्छा है क्योंकि गुजरात, मध्य प्रदेश की अपेक्षा अधिक विकसित राज्य है, उसकी छवि यदि किसी को ग़लत नज़र आती है तो वह इसलिए कि लंबे समय से मीडिया और मानव अधिकार वाले ऐसा बताए जा रहे हैं।
    विदेशी हाथ तो नहीं परंतु बाहरी तत्व ज़रूर हैं तो इन्दौर में, मालवा में रचे बसे नहीं हैं।


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